नई दिल्ली।। बिजली के बाद दिल्ली वाले अब पानी के निजीकरण के लिए तैयार हो जाएं। जी हां, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब दिल्ली में पानी के निजीकरण पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि राजधानी में पानी का वितरण सही तरीके से नहीं हो रहा है। इस समस्या से निजात तभी मिलेगी जब इसे निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा।
निजीकरण का फ़ैसला कब तक हो जाएगा, इस सवाल पर सीएम ने कहा कि इस पर अभी एक-दो साल लगेंगे। वहीं, बिजली के निजीकरण से सरकार जरूर संतुष्ट नजर आ रही है लेकिन जनता का अनुभव इस मामले में बहुत अच्छा नहीं है। आम जनता को आशंका है कि पानी का भी वही हाल हो सकता है जो बिजली के मामले में हो रहा है।
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