मुंबई।।
बॉलीवुड ने एक और सितारा खो दिया है। गुजरे जमाने के सुपर स्टार राजेश खन्ना ने दुनिया को अलविदा कह दिया। काका महीनों से बीमार थे, सोमवार को ही उन्हें लीलावती अस्पताल से छुट्टी मिली थी लेकिन उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। मुंबई स्थित अपने 'आर्शीवाद' में काका ने अपने घर पर अंतिम सांस ली उनके निधन की ख़बर सुनते ही बॉलीवुड से लेकर सियासत की दुनिया में सदमे की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजेश खन्ना के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
राजेश खन्ना को लोग प्यार से 'काका' कह कर पुकारते थे। ये राजेश खन्ना ही थे जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में परदे पर रोमांस को एक नई पहचान दी। दिलचस्प बात ये है कि राजेश खन्ना एक टेलेंट हंट प्रतियोगिता के विजेता बन कर फिल्मों में आए थे। राजेश खन्ना की शुरुआत 'आखिरी खत', 'बहारों के सपने' और 'राज' जैसी फिल्मों से हुई, लेकिन 1969 में आई 'अराधना' ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया। राजेश खन्ना ने 1969 से 1972 के बीच लगातार 15 हिंट फिल्में दीं। कुछ फिल्मी पंडित कहते हैं कि ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है जो अब तक नहीं टूटा है और ऐसे में काका तो चले गए लेकिन पिछे छोड गए अपनी यादे।
मुमताज के साथ राजेश खन्ना की जोड़ी बेहद हिट रही. दोनों आठ फिल्मों में एक साथ आए और ये सभी बड़ी गोल्डन जुबली हिट रहीं लेकिन शर्मिला टैगोर, आशा पारिख और जीनत अमान जैसी अभिनेत्रियों के साथ भी उनकी जोड़ी को खासा पसंद किया गया। लेकिन 1976 के बाद से उनकी फिल्में बॉक्स पर कमजोर पड़ने लगीं। दरअसल ये वो दौर था जब हिंदी फिल्मों के दूसरे और सबसे बड़े सुपरस्टार अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा पर छाने लगे थे।
1980 के दशक में भी राजेश खन्ना फिल्मों में दिखते रहे लेकिन 1990 का दशक आते आते राजेश खन्ना ने फिल्मों को अलविदा कह दिया और राजनीति में आ गए। वो 1991 में कांग्रेस के टिकट पर नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए।
बताते हैं कि उनके चाहने वाले उन्हें अपने खून से लिखी चिट्ठियां भेजा करते थे। हाल ही में राजेश खन्ना पंखों के एक विज्ञापन में दिखाई दिए। विज्ञापन में बेहद कमजोर दिख रहे राजेश खन्ना ये कहते दिखाई दिए कि उनके ‘फैंस’ हमेशा उनके साथ रहेंगे। अपने सुपरस्टार के चले जाने से दुखी फैन्स की आंखें नम हैं। सुपरस्टार राजेश खन्ना का आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। 'काका' आज अपने अंतिम सफर पर जाने वाला है। काका के नाती आरव पवनहंस श्मशान घाट में अपने नाना को मुखाग्नि देंगे।
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