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Dharam Karam

महात्मा गांधी से जुडे विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए गांधी धरोहर स्थल मिशन स्थापित

mahatama_gandhi3434नई दिल्ली।। सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुडे विरासत स्थलों के संरक्षण के मकसद से गांधी धरोहर स्थल मिशन स्थापित करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ये फैसला लिया गया।

बैठक के बाद जारी सरकारी बयान में कहा गया कि मिशन के तहत गांधी विरासत सामग्री की पहचान और सूचना के आंकलन का कार्य होगा। इसके तहत दस्तावेजों और वस्तुओं के संरक्षण के तौर तरीके और प्राथमिकताएं भी तय होंगी ।

विशेषकर अभिलेखीय भंडारण और संग्रह की दृष्टि से ऐसा किया जाएगा। मिशन के तहत ऐसे दस्तावेजों और वस्तुओं के रखरखाव के दिशानिर्देश भी तय होंगे।

श्रद्धालुओं के लिए खुले भगवान बदरीनाथ के कपाट

badrinath_new2332भगवान बदरीनाथ के कपाट आज से सभी श्रद्धालुओं के लिए खोले जा रहे हैं, कपाट खुलने की परंपरा के तहत सोमवार को टिहरी राजपरिवार ने भगवान बदरीनाथ के श्रृंगार के लिए तिलों के तेल को घड़े में भरकर बदरीनाथ के लिए रवाना किया, सदियों से ये इस परंपरा को टिहरी राज परिवार ही निभाता आया है।

नरेंद्रनगर स्थित राजमहल में सुहागिन महिलाओं ने तिल को पीसकर तेल निकाला। टिहरी की महारानी माला राजलक्ष्मी भी इस तेल को निकालने में अपना सहयोग करती हैं। इस तेल को एक घड़े में भरकर बदरीनाथ धाम पहुंचा दिया गया है, जहां पर कपाट खुलने के छह महीने तक इसी तेल से भगवान बदरीनाथ की पूजा अर्चना की जाएगी।

इस तेल से स्नान कराने के बाद, भगवान बदरीनाथ का श्रृंगार किया जाएगा, जिसके बाद आम श्रृद्धालु बाबा के दर्शनों का लाभ उठा सकेंगे।

हनुमान जयंती पर चंद्रग्रहण

hanuman_jayanti_grahanनई दिल्ली।। इस साल पड़ने वाले तीन चंद्रग्रहणों में से पहला चंद्रग्रहण गुरुवार को लगेगा और देशभर के अंतरिक्ष प्रेमी इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। चंद्रमा का एक छोटा सा हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा, जिसकी वजह से आंशिक चंद्रग्रहण की स्थिति पैदा होगी।  

इस साल हनुमान जयंती के अवसर पर चंद्रग्रहण का साया मंडरा रहा है। यही वजह है कि जयंती के दिन शाम चार बजे के बाद भक्तों को हनुमानजी के दर्शन नहीं होंगे। चंद्रग्रहण के कारण मंदिरों के पट शाम चार बजे से ही बंद हो जाएंगे। भक्तों को सूतक काल के पहले ही हनुमान जी के दर्शन और पूजन करने होंगे। तिथियों के मुताबिक हनुमान जयंती पर इस साल चंद्रग्रहण का असर रहेगा।

इस बार चंद्रग्रहण में नौ घंटे पहले सूतक लग रहा है। इस अवधि में पूजा-पाठ नहीं होते। सूतक के कारण मंदिरों के पट नौ घंटों तक बंद रहेंगे। चंद्रग्रहण 25 अप्रैल की रात 1 बजकर 22 मिनट से शुरू होगा और रात 1 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगा। हनुमान जयंती के दिन चंद्रग्रहण की स्थिति सालों बाद बन रही है।

नवरात्र का आठवां दिन , महागौरी की पूजा का विशेष महत्व

mahagauri4334नई दिल्ली।। आज चैत्र नवरात्र का आठवां दिन यानि महाष्टमी है। महाष्टमी के दिन महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है। देश भर में महाष्टमी की पूजा की जाती है। मां गौरी को शिव की अर्धागनी और गणेश की माता के रुप में जाना जाता है।

महागौरी की शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी दुख धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं।
भगवती महागौरी वृषभ के पीठ पर विराजमान हैं, जिनके मस्तक पर चन्द्र का मुकुट है। मणिकान्तिमणि के समान कान्ति वाली अपनी चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष और बाण धारण किए हुए हैं, जिनके कानों में रत्नजडितकुण्डल झिलमिलाते हैं।

आज के दिन ही अन्नकूट पूजा यानी कन्या पूजन का भी विधान है। कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं लेकिन अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ रहता ह। इस पूजन में 9 कन्याओं को भोजन कराया जाता है।

नवरात्र का सांतवा दिन आज, मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व

maa_kalratri3434नई दिल्ली।। आज नवरात्र का सांतवा दिन है और नवरात्र के सातवें दिन आदि शक्ति मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का विधान है। व्यापार संबंधी समस्या, ऋण मुक्ति एवं अचल संपत्ति के लिए मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। देखने में मां का स्वरूप विकराल है। परंतु मां सदैव ही शुभ फल प्रदान करती हैं। इस दिन साधक गण अपने मन को सहस्रार चक्र में स्थित करते हैं और मां की अनुकंपा से उन्हें ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियां प्राप्त होती है। मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना एवं साधना द्वारा अकल मृत्यु, भूत-प्रेत बाधा, व्यापार, नौकरी,  शत्रुभय आदि से छुटकारा प्राप्त होता है।

नवरात्र का सातवां दिन भगवती कालरात्रि की आराधना का दिन है। श्रध्दालु भक्त व साधक अनेक प्रकार से भगवती की अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए व्रत-अनुष्ठान व साधना करते हैं। कुंडलिनी जागरण के साधक इस दिन सहस्रार चक्र को जाग्रत करने की साधना करते हैं।

वे गुरु कृपा से प्राप्त ज्ञान विधि का प्रयोग कर कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत कर शास्त्रोक्त फल प्राप्त कर अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं। जगदम्बा भगवती के उपासक श्रध्दा भाव से उनके कालरात्रि स्वरूप की पूजा कर उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को कृतार्थ करते हैं।