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यूनिवर्सल हुई भारत की देसी पत्‍तल, यूरोप में भारी डिमांड

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-12-15 09:06:59.0

यूनिवर्सल हुई भारत की देसी पत्‍तल, यूरोप में भारी डिमांड

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पुराने समय से ही भारत में साल ओर सियाली के पत्‍तों से बनने वाली पत्‍तलों का चलन है लेकिन वक्‍त के साथ यह पीछे छूट रही हैं। जहां भारत में इनका उपयोग कम हुआ है वहीं दुनिया अब इन्‍हें खुशी-खुशी अपनाने लगी है।

यूरोपीय देशों में आसानी से डिकम्‍पोज हो सकने वाली इन ईको फ्रेंडली पत्‍तलों का चलन तेजी से बढ़ा है और एक स्‍टार्टअप कंपनी ने इनका प्रचार और प्रोडक्‍शन शुरू किया है। यहां तक की यूरोप की कुछ बड़ी होटल्‍स ने भी भारत से इन पत्‍तलों का आयात शुरू किया है।

उड़ीसा के भुवनेश्‍वर में रहने वाली ट्रायबल लोगों के लिए यह रोजी का जरिया भी बन गया है। इस साल मई में यूरोप की होटल्‍स ने उड़ीसा से पत्‍तलों के आयात की डील की थी

डील करने वाली जर्मन कंपनी के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार क्‍लाइमेट चेंज के लिए किए गए पेरिस एग्रीमेंट में लंबे समय के पर्यावरण स्‍थायित्‍व की बात कही गई है।

इस बीच एक जर्मनी कंपनी ने भी अपने स्‍टार्टअप के माध्‍यम से पत्‍तों से बनी पत्‍तलों को बाजार में उतारा है और इसके बाद इनकी बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आलत यह है कि बाजार में इन पत्‍तलों की इतनी डिमांड है जि‍से पूरी करने में कंपनी को काफी पसीना बहना पड़ रहा है।

तीन परतों में बनती है यह प्‍लेट

जर्मन कंपनी जो प्‍लेट्स बना रही है वो तीन परतों में बनती है। जिसमें उपरी और निचली परत पत्‍तों की होती है वहीं बीच की परत कार्टोन जैसा म‍टेरियल होता है। इससे बनने वाली प्‍लेट वॉटरप्रूफ होने के साथ ही माइक्रोवेव में भी उपयोग की जा सकती है और इनकी उम्र एक साल की होती है। यूज होने के बाद इन्‍हें कहीं भी डिकम्‍पोज होने के लिए डाल दिया जाता है और एक महीने में ही यह गलकर डिकम्‍पोज हो जाती हैं।

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