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सुनामी के बाद 10 फीट तक समुद्री लहरें उठी, 6 जख्मी; फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के ऑपरेशन पर पड़ा असर

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-11-23 07:41:12.0

सुनामी के बाद 10 फीट तक समुद्री लहरें उठी, 6 जख्मी; फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के ऑपरेशन पर पड़ा असर

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. जापान के उत्तरी इलाके में मंगलवार सुबह करीब 6 बजे (भारतीय वक्त के मुताबिक 2.30 बजे) भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्‍टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.9 थी। इसके बाद नॉर्थ पैसिफिक कोस्टल एरिया में सुनामी आ गई। 10 फीट तक लहरें उठीं। 6 घायल हुए। भूकंप का केंद्र फुकुशिमा के पास जमीन के 10 किमी नीचे था। इसके चलते यहां न्यूक्लियर प्लांट के कूलिंग ऑपरेशन पर असर पड़ा है। बता दें कि 2011 में सुनामी के चलते न्यूक्लियर प्लांट का कुछ हिस्सा डैमेज हो गया था। टोक्यो तक महसूस किए गए भूकंप के झटके...
- भूकंप के झटके टोक्‍यो तक महसूस किए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) ने शुरुआत में रिक्‍टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.3 आंकी थी, लेकिन बाद में इसको घटाकर 6.9 कर दिया।
- इस दौरान कुछ कोस्टल एरिया में 1 से 3 मीटर (करीब 10 फीट) तक लहरें उठीं।
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह 6:38 मिनट (लोकल टाइम) में एक मीटर ऊंची सुनामी की लहरें फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लान्ट से टकराईं।
- जापान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनएचके के मुताबिक, टोक्‍यो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, भूकंप के मद्देनजर फुकुशिमा में अपने एटमी प्‍लान्ट में नुकसान का जायजा ले रहा है।
- वहीं, तोहोकू इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन ने कहा कि उसके ओनागावा न्यूक्लियर प्‍लान्ट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
पांच साल पहले इस न्यूक्लियर प्लांट में क्या हुआ था?
- 2011 में जापान के फुकुशिमा में ही 9 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया था।
- इससे न्यूक्लियर प्लान्ट को भारी नुकसान पहुंचा था।
- लीकेज के कारण आग लग गई थी। कई हिस्से तबाह हो गए थे।
- इसके कारण देश के सभी न्यूक्लियर प्लांट बंद कर दिए गए थे। फुकुशिमा प्लांट में इमरजेंसी का एलान कर दिया गया था।
क्यों आता है जापान में इतना भूकंप?
- जापान भूकंप के सबसे ज्यादा सेंसिटिव एरिया में है। यह पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में आता है।
- रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है, जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी हैं।
- ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और वॉल्केनो फटते हैं।
- इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर और साउथ अमेरिका तक देखा जा सकता है।
- दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग आॅफ फायर में आते हैं। यह इलाका 40 हजार किलोमीटर में फैला है।
- दुनिया में जितने एक्टिव वॉल्केनो हैं, उनमें से 75% इसी एरिया में हैं। 15 देश इस रिंग ऑफ फायर की जद में हैं।

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