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पास-पड़ोस के मुल्कों से सुरक्षा के मोर्चे पर खतरों का सामना कर रहे भारत की टेंशन और बढ़ सकती है.

👤 Admin5 User | Updated on:2017-03-03 10:52:27.0

पास-पड़ोस के मुल्कों से सुरक्षा के मोर्चे पर खतरों का सामना कर रहे भारत की टेंशन और बढ़ सकती है.

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पास-पड़ोस के मुल्कों से सुरक्षा के मोर्चे पर खतरों का सामना कर रहे भारत की टेंशन और बढ़ सकती है. दरअसल, मालदीव की सत्ताधारी अब्दुल्ला यामीन सरकार ने अपने एक द्वीप का पूरा नियंत्रण सऊदी अरब को देने की योजना बनाई है. अगर ऐसा हुआ तो भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं.

मालदीव की विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रैटिक पार्टी (MDP) ने एक भारतीय समाचार पत्र से बातचीत में बताया कि देश के 26 द्वीपों में से एक फाफू को सऊदी अरब को बेचने का फैसला खतरनाक साबित हो सकता है. पार्टी का मानना है कि इससे देश में वहाबी विचारधारा को बढ़ावा मिलेगा. बता दें कि सीरिया में लड़ रहे विदेशी फाइटर्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मालदीव्स की भी है.

एमडीपी के मुताबिक, द्वीप की जमीन देने और सऊदी की कीमत पर ईरान से 41 साल पुराने रिश्तों को खत्म करने के फैसले को मालदीव में दशकों से प्रभावी वहाबी विचारधारा के प्रसार के तौर पर देखा जाना चाहिए.

एमडीपी के एक नेता ने कहा, 'सऊदी अरब हर साल 300 स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप देता है. मालदीव की आबादी का 70 फीसदी हिस्सा वहाबी पंथ को अपना चुका है. राष्ट्रपति यामीन सऊदी अरब से इस्लामिक टीचर्स लाना चाहते हैं. उनका यह फैसला स्कूलों को मदरसों में तब्दील कर देगा.'

सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल्ला अजीज अल सउद जल्द ही मालदीव के दौरे पर होंगे. एमडीपी के सदस्य और देश के पूर्व विदेश मंत्री अहमद नसीम ने कहा कि देश की सरकार ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले लोगों की राय लेने के बारे में भी नहीं सोचा. नसीम ने कहा, 'मालदीव में विदेशियों को जमीन बेचना बेहद असाधारण कदम है. पुराने वक्त में इसे गद्दारी के तौर पर देखा जाता था, जिसकी सजा मौत होती थी.'

बता दें कि मालदीव की सरकार ने 2015 में संविधान में एक संशोधन किया, जिसके बाद मालदीव में विदेशियों द्वारा जमीन खरीदना मुमकिन हो सका.

भारत के पड़ोस में स्थित देशों में मालदीव इकलौता देश है, जहां जाने से पीएम नरेंद्र मोदी परहेज करते नजर आए. भारत मालदीव के अंदरूनी मामलों से खुद को दूर रखने की कोशिश करता रहा है. हालांकि, भारत को जल्द ही कोई स्पष्ट रुख अख्तियार करना होगा क्योंकि वहां अगले साल चुनाव हो सकते हैं.

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