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कुछ ऐसी होती है 'आलोचना की आदत'

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-12-29 11:38:57.0

कुछ ऐसी होती है आलोचना की आदत

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जब अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन युवा थे। वह अमूमन विरोधियों की हंसी उड़ाने के लिए पत्र छपवा कर सड़कों पर फेंक दिया करते थे। बाद में यही पत्र उन्होंने समाचार पत्रों में छपवाना शुरु कर दिया।

एक बार की बात है। समाचार पत्र में गुमनाम चिट्ठी छपवाई। यह पत्र उन्होंने जेम्स शिल्ड्ज नाम के उग्र व्यक्ति के नाम लिखा। वह आयरिश राजनीतिज्ञ था। उस व्यंग्य पत्र को जिसने भी पढ़ा, उसके चेहरे पर हंसी की बारिश जरूर होती थी।

जल्द ही यह बात शिल्ड्ज के पास तक पहुंची। वह काफी नाराज हुए और उन्होंने यह पता लगवाया कि यह समाचार पत्र में मेरे नाम का व्यंग्य पत्र किसने लिखा है। जब उन्हें पता चला कि यह व्यंग्य लिंकन ने प्रकाशित करवाया है तो वह उनसे मिले और उन्हें द्वंद युद्ध के लिए ललकारा।

लिंकन लड़ना नहीं चाहते थे। फिर भी दोनों के बीच द्वंद युद्ध के लिए एक दिन तय किया गया। युद्द में तलवार से लड़ा जाना था। ऐसे में उन्होंने अपने उस्ताद की मदद से तलवारबाजी करना सीखा। युद्ध की यह बात चारों तरफ फैल गई। ऐसा माना जाने लगा कि इस युद्ध में एक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है।

द्वंद युद्ध का समय नजदीक आ रहा था। और फिर अंतिम समय में...द्वंद युद्ध को रोक दिया गया। अब्राहम लिंकन के जीवन की यह बहुत ही भयानक घटना थी। जिससे उन्होंने सीखा कि आलोचना और भर्त्सना का परिणाम अच्छा नहीं होता है।

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