Home » धर्म समाचार » जहां मृत्यु होनी है तब मृत्यु होगी

जहां मृत्यु होनी है तब मृत्यु होगी

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-12-28 08:14:56.0

जहां मृत्यु होनी है तब मृत्यु होगी

Share Post

मृत्यु जीवन का अंतिम कटु सत्य है। मृत्यु के लिए दो कार्य आवश्यक हैं। प्रथम, मनुष्य जब पांच तत्वों अर्थात जल, वायु, आकाश, पृथ्वी व अग्नि का कर्ज चुका दे तब मृत्यु को प्राप्त होगा। दूसरा, वह स्थान, वह विधि जब स्थूल शरीर को मिल जाए, जहां मृत्यु होनी है तब मृत्यु होगी। जहां अंतिम सांस ली वह उसका मृत्यु का स्थान था। जब हम मृत पड़ गए शरीर को अग्नि को समर्पित करते हैं तो वह पांचों तत्वों का कर्ज चुकाता है। इसलिए ही शव को जलाने का चलन है।

चिता की अग्नि में देह भस्तसात् हो जाती है। दीपदान से जीवात्मा को मुक्ति मार्ग की उपलब्धि होती है। शास्त्र कहते हैं कि अंश अपनी अंशी के पास पहुंचकर ही विश्रम लेता है। इसी प्रकार चैतन्य प्राण वायु के रूप में प्रवाहित अग्नितत्व अपने उद्गम स्थल सूर्चपिंड में पहुंचकर ही विश्रम लेता है। दीपक मृतक आत्मा के पथ को प्रकाशित कर, उसे गंतव्य पर पहुंचने में सहयोग करता है।

ज्योतिष की दृष्टि से कितने घंटे का एक प्रहर होता है। तीन घंटे अर्थात साढ़े सात घटी का एक प्रहर होता है।चौबीस घंटे में कितने प्रहर होते हैं। आठ पहर होते हैें।आठों पहरों के नाम, दिन में-पूर्वार्ध, मध्याह्न्, अपराह्न्, सायं, रात्रि में-प्रदोष, निशीथ, त्रियामा, उषा। दीपदान से जीवात्मा को मुक्ति मार्ग की उपलब्धि होती है। दीपदान से जीवात्मा को मुक्ति मार्ग की उपलब्धि होती है।

Like Us
Share it
Top