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यहां है हत्याहरण तीर्थ, और इसलिए है प्रसिद्ध

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-12-14 08:48:49.0

यहां है हत्याहरण तीर्थ, और इसलिए है प्रसिद्ध

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मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने जब रावण का वध किया तो उसके कुछ दिन बाद यहां ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त होने आए थे। उन्होंने यहां मौजूद तालाब में स्नान किया था। सदियों पुराने मौजूद मंदिर तो वर्तमान में नहीं हैं, लेकिन इस तीर्थ का जीर्णोद्वार 28 मई 1939 को श्रीमती जनक किशोरी देवी पत्नी स्वर्गीय ठाकुर जनन्नाथ सिंह सुपुत्र ठाकुर शंकर सिंह रईस की याद में कराया गया था। जगन्नाथ सिंह काकूपूर के जमींदार थे।

शिव पुराण में हत्याहरण तीर्थ के बारे में एक रोचक प्रसंग मिलता है। यह कहानी सतयुग की है। एक बार माता पार्वती के साथ, भगवान शिव अर्रान्य जंगल की खोज में निकले, और वह नैमिषारण्य में रुके। यह एक सुंदर वन था। शिव यहां तप करने लगे। माता पार्वती जंगल में भ्रमण कर रही थी तभी उनको प्यास लगी। आस-पास जल भी नहीं था।

ऐसी विषम परिस्थिति में उन्होंने देवताओं से जल लाने का आग्रह किया। तब भगवान सूर्य कमंडल में जल लेकर उपस्थित हुए। जब माता पार्वती जलपान कर रही थी, तब उस समय कमंडल से कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं। वहां एक जलकुंड बन गया।

जब शिव-पार्वती उस स्थान से जाने लगे। तब शिव ने इस जलकुंड का नाम प्रभास्कर क्षेत्र रखा। त्रेतायुग में यही वह जगह थी। जहां श्रीराम ने ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त होने के लिए स्नान किया था।

उन्होंने कहा, इस तीर्थ में जो भी ब्रह्महत्या के पाप से पीड़ित व्यक्ति स्नान करेगा। वह इस दोष से मुक्त हो जाएगा। तब से यह तीर्थ हत्याहरण के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

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