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दुर्लभ, वायु के समान विचित्र वस्तुओं का संग्रह था रावण का पुष्पक विमान

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-12-13 12:02:45.0

दुर्लभ, वायु के समान विचित्र वस्तुओं का संग्रह था रावण का पुष्पक विमान

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भारतीय वांगमय में सबसे प्राचीन विमान के रूप में पुष्पक विमान की चर्चा सबसे पहले वाल्मीकि रामायण में मिलती है। वैदिक साहित्य में देवताओं के विमानों की चर्चा है, लेकिन दैत्यों और मनुष्यों द्वारा उपयोग किया गया पहला विमान पुष्पक ही माना जाता है। वाल्मीकि रामायण के विभिन्न संदर्भों का सार यह है कि विश्वकर्मा ने पुष्पक विमान का निर्माण कर ब्रह्मा को भेंट किया था। ब्रह्मा ने यह विमान लोकपाल कुबेर को दे दिया।

कुबेर से ही इस विमान को रावण ने छीना था। रामायण के अनुसार इस विमान की विशेषता यह थी कि इसका स्वामी जो मन में विचार करता था, उसी का यह अनुसरण करता था। यह एक शीघ्रगामी, दूसरों के लिए दुर्लभ, वायु के समान वेगशाली और विचित्र वस्तुओं का संग्रह था। पौराणिक संदर्भों में विज्ञान की खोज करने वालों की मान्यता है कि प्राचीन भारतीय विज्ञान आधुनिक विज्ञान की तुलना में अधिक संपन्न था।

इस लिहाज से इस विमान का असतित्व और उसकी प्रमाणिकता स्वीकारी जाती है। इसके पीछे तर्क या प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन प्राचीन भारतीयों की वैज्ञानिक क्षमता में विश्वास करने वाले जानते हैँ कि यह विमान था और तत्कालीन विज्ञान का सबसे अच्छा नमूना था। भगवान राम रावण पर विजय के बाद इसी विमान से अयोध्या लौटे थे।

भारतीय इतिहास में सबसे प्राचीन विमान के रूप में पुष्पक विमान का जिक्र सबसे पहले वाल्मीकि रामायण में मिलता है। वैदिक साहित्य में देवताओं के विमानों की चर्चा है, लेकिन दैत्यों और मनुष्यों द्वारा उपयोग किया गया पहला विमान पुष्पक ही माना जाता है। वाल्मीकि रामायण में मिली कथाओं का सार यह है कि विश्वकर्मा ने पुष्पक विमान का निर्माण ब्रह्मा को भेंट किया था। ब्रह्मा ने यह विमान लोकपाल कुबेर को दे दिया।

कुबेर से ही इस विमान को रावण ने छीना था। रामायण के अनुसार इस विमान की विशेषता यह थी कि इसका स्वामी जो मन में विचार करता था, उसी का यह पालन करता था। यह एक तेजी से चलने वाला, दुर्लभ और विचित्र चीजों का संग्रह था। पौराणिक संदर्भों में विज्ञान की खोज करने वालों की मान्यता है कि प्राचीन भारतीय विज्ञान आधुनिक विज्ञान की तुलना में अधिक संपन्न था।


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