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द्रौपदी का शरीर कमल जैसा कोमल और सुन्दर था इसीलिए..

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-12-12 12:41:16.0

द्रौपदी का शरीर कमल जैसा कोमल और सुन्दर था इसीलिए..

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महारानी द्रौपदी की उत्पत्ति यज्ञकुण्ड से हुई थी| ये महराज द्रुपद की अयोनिजा कन्या थीं| इनका शरीर कृष्णवर्ण के कमल के जैसा कोमल और सुन्दर था, अत: इन्हें 'कृष्णा' भी कहा जाता था| इनका रूप और लावण्य अनुपम एवं अद्वितीय था|

इनके जन्म के समय आकाशवाणी हुई थी - 'देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिये एवं उन्मत्त क्षत्रियों के संहार के लिये ही इस रमणीरत्न का जन्म हुआ है| इसके द्वारा कौरवों को बड़ा भय होगा|' स्वयंवर में अर्जुनके द्वारा लक्ष्य भेद करने पर द्रौपदी पाण्डवों को प्राप्त हुईं| कई दैवी कारणों से द्रौपदी पाँचों पाण्डवों की पत्नी हुईं| ये पाँचों पाण्डवों को अपने शील, स्वभाव और प्रेममय व्यवहार से प्रसन्न रखती थीं|

जब कपट से द्यूत में महाराज युधिष्ठिर अपने राजपाट, धन-वैभव तथा स्वयं के साथ द्रौपदी-तक को हार गये, तब दु:शासन दुर्योधनके आदेश से द्रौपदी को एक वस्त्रावस्था में खींचकर भरी सभा में ले आया| सभा में रोते-रोते द्रौपदी ने सभासदों से अपनी रक्षा के लिये प्रार्थना की| दुष्ट दु:शासन उन्हें भरी सभा में नग्न करना चाहता था| भीष्म, द्रोण ने अपनी आँखें मूँद लीं, विदुर सभा से उठकर चले गये| जब द्रौपदी चारों ओर से निराश हो गयीं, तब उन्होंने आर्तस्वर में भगवान् श्रीकृष्ण को पुकारा| 'हे कृष्ण, हे गोविन्द! क्या तुम नहीं जानते कि मैं कौरवों के द्वारा अपमानित हो रही हूँ| कौरवरूपी समुद्र में डूबती हुई मुझ अबलाका उद्धार करो| कौरवोंके बीच विपन्नावस्था को प्राप्त मुझ शरणागतकी रक्षा करो|' भक्तके लिये भगवान् को वस्त्रावतार लेना पड़ा और दस हजार हाथियोंके बलवाला दु:शासन साड़ी खींचते-खींचते थक गया, किंतु साड़ी का अन्त नहीं मिला और द्रौपदीकी लाज बच गयी| जिसके रक्षक नन्दनन्दन भगवान् श्याम सुन्दर हों, उसका भला कोई क्या बिगाड़ सकता है!

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