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दुनिया का एकमात्र धर्म जिसमें ग्रंथ की मनाई जाती है जयंती

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-11-04 12:44:09.0

दुनिया का एकमात्र धर्म जिसमें ग्रंथ की मनाई जाती है जयंती

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ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। यह तिथि गीता जयंती के नाम से भी प्रसिद्ध है।

भारत ही दुनिया का एकमात्र देश हैं जहां ग्रंथ की जयंती मनाई जाती है। हिंदु धर्म का प्रमुख ग्रंथ श्रीमद भगवद गीता जिसे गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है वह इसलिए क्यों कि श्रीमद भगवद गीता का जन्म स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से हुआ है।

नई दिशा देने के लिए दिया उपदेश

यह एकादशी मोह का क्षय करनेवाली है। इस कारण इसका नाम मोक्षदा है। भगवान श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष में आने वाली इस मोक्षदा एकादशी के बारे में कहते हैं 'मैं महीनों में मार्गशीर्ष का महीना हूं।' इसके पीछे मूल भाव यह है कि मोक्षदा एकादशी के दिन मानवता को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश हुआ था।

अज्ञानता से आत्मज्ञा की ओर

गीता केवल लाल कपड़े में बांधकर घर में रखने के लिए नहीं बल्कि उसे पढ़कर संदेशों को आत्मसात करने के लिए है। गीता का चिंतन अज्ञानता को हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है। गीता भगवान की श्वास और भक्तों का विश्वास है। गीता ज्ञान का अद्भुत भंडार है। हम सब हर काम में तुरंत नतीजा चाहते हैं लेकिन भगवान ने कहा है कि धैर्य के बिना अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध, काम और लोभ से निवृत्ति नहीं मिलेगी।

यही है अनुपम जीवन ग्रंथ

गीता मंगलमय जीवन का ग्रंथ है। गीता जीवन को तो धन्य बनाती ही है माेक्ष का मार्ग भी सुझाती है। गीता केवल धर्म ग्रंथ ही नहीं यह एक अनुपम जीवन ग्रंथ है। जीवन उत्थान के लिए इसका स्वाध्याय हर व्यक्ति को करना चाहिए। गीता एक दिव्य ग्रंथ है।

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