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गोवर्धन पूजाः ये हैं शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-10-31 10:35:53.0

गोवर्धन पूजाः ये हैं शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

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दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के दिन शाम के समय खास पूजा रखी जाती है। बता दें कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने इंद्र का मानमर्दन कर गिरिराज की पूजा की थी। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है। इस दिन गोबर का गोबर्धन बनाया जाता है इसका खास महत्व होता है। इस दिन सुबह-सुबह गाय के गोबर से गोबर्धन बनाया जाता है। यह मनुष्य के आकार के होते हैं। गोबर्धन तैयार करने के बाद उसे फूलों और पेड़ों का डालियों से सजाया जाता है। गोबर्धन को तैयार कर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। गोवर्धन में ओंगा यानि अपामार्ग की डालियां जरूर रखी जाती हैं।

पूजा करने के बाद गोवर्धनजी की परिक्रमा की जाती है। सात परिक्रमाएं करते वक्त उनकी (गोवर्धनजी की) जय बोली जाती है। परिक्रमा करते समय एक व्यक्ति हाथ में पानी का लोटा और दूसरे हाथ में खील लेकर चलते हैं। जल लेकर चलने वाला व्यक्ति पानी की धारा गिराते हुए और दूसरे लोग जौ बोते हुए परिक्रमा करते हैं। गोबर्धनजी एक पुरुष के रूप में बनाए जाते हैं। इनकी नाभि की जगह पर अक कटोरी या मिट्टी का दीपक रखा जाता है। फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे पूजा के समय डाले जाते हैं। बाद में इसे प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है।

पूजन विधि

गोवर्धन पूजा का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन सुबह शरीर पर तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए। फिर घर के द्वार पर गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत बनाएं। इस पर्वत के बीच में पास में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रख दें। अब गोवर्धन पर्वत व भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानों व मिष्ठानों का भोग लगाएं। साथ ही देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करें। पूजा के बाद कथा सुनें। प्रसाद के रूप में दही व चीनी का मिश्रण सब में बांट दें। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन करवाकर उसे दान-दक्षिणा देकर प्रसन्न करें।

शुभ मुहूर्त

सुबह 06:20 से 07:20 बजे तक

सुबह 09:20 से 10:30 बजे तक

दोपहर 01:30 से 2:00 बजे तक

दोपहर 02:50 से 04:10 बजे तक

शाम 04:10 से 05:30 बजे तक

अन्नकूट में चंद्र अन्नकूट में चंद्र-दर्शन अशुभ माना जाता है। यदि प्रतिपदा में द्वितीया हो तो अन्नकूट अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन सुबह तेल मलकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पूजा का समय कहीं सुबह, कहीं दोपहर तो कहीं शाम के समय है। इस दिन सन्ध्या के समय दैत्यराज बलि का पूजन भी किया जाता है।

गोवर्धन गिरि भगवान के रूप में माने जाते हैं और इस दिन घर में उनकी पूजा करने से धन, धान्य, संतान और गोरस की वृद्धि होती है। आज का दिन तीन उत्सवों का संगम होता है।

इस दिन दस्तकार और कल-कारखानों में काम करने वाले कारीगर भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी करते हैं। इस दिन सभी कल-कारखाने तो बंद रहते ही हैं, घर पर कुटीर उद्योग चलाने वाले कारीगर भी काम नहीं करते। भगवान विश्वकर्मा और मशीनों एवं उपकरणों का दोपहर के समय पूजन किया जाता है।

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त : प्रातः 06:20 बजे से 07:20 बजे तक

गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त : दोपहर बाद 03:21 बजे से सायं 05:32 बजे तक

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ : रात्रि 11:08 बजे से, 30 अक्तूबर 2016

प्रतिपदा तिथि समाप्त : रात्रि 1:39 बजे तक, 1 नवम्बर 2016

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