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रूप चतुर्दशी : चित्रा नक्षत्र में रूप लावण्य के लिए तिल-तेल से स्नान

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-10-29 11:30:07.0

रूप चतुर्दशी : चित्रा नक्षत्र में रूप लावण्य के लिए तिल-तेल से स्नान

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पांच दिनी दीपोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को रूप चतुर्दशी का उल्लास छा गया है। रूप लावण्य के लिए सूर्योदय के समय उबटन लगाकर तेल तिल से स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया गया। अकाल मृत्यु के भय से निजात के लिए यम देवता का पूजन कर प्रदोषकाल में दीप दान भी किया जाएगा।

चतुर्दशी तिथि की शुरुआत शुक्रवार को शाम 6.21 से हुई जो शनिवार को रात 8.39 तक रहेगी। दिवस पर्यंत सौंदर्यदायक चित्रा नक्षत्र भी रहेगा। ज्योतिर्विद श्याम अग्रवाल के मुताबिक इस दिन सुबह उबटन और तिल्ली का तेल शरीर में लगाकर शुद्ध जल से स्नान का महत्व बताया गया है।

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन भी किया जाता है। संध्या के समय दीपदान करते हैं। दक्षिण दिशा में यम देवता के लिए 14 दीपक लगाने का विधान है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

सौंदर्य के लिए भगवान कृष्ण और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यम पूजन

चौघड़िया अनुसार...

शुभ : सुबह 7.55 से 9.19 बजे तक।

चर : दोपहर 12.08 से 1.32 बजे तक।

लाभ : दोपहर 1.33 से 2.56 और शाम 5.44 से 7.20 बजे तक।

अमृत : दोपहर 2.57 से 4.20 बजे तक

दीपदान : शाम 5.44 से 7.51 बजे तक

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