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इस प्रकार तीनों योगों का संयोग बना है जो अत्यंत शुभ रहेगा

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-10-15 10:29:00.0

इस प्रकार तीनों योगों का संयोग बना है जो अत्यंत शुभ रहेगा

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शरद पूर्णिमा 15 अक्टूबर 2016 शनिवार को है। इस पर्व पर रवि योग, गुरू-चन्द्रमा की परस्पर पूर्ण दृष्टि होने से है । और गजकेशरी योग व गुरू-चन्द्रमा के आमने-सामने होने से बना है । समसप्तक योग इस प्रकार तीन योगों का संयोग बना है।

त्रियोग होने के साथ ही पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण रहेगा। इसलिये अमृत की बरसात होगी! इस योग में नए व्यापार की शुरूआत भूमि,भवन,वाहन खरीदना, खरीदना, सोना, चांदी या कोई भी धातु खरीदना अत्यंत शुभ रहेगा।

शरद ऋतु, पूर्णाकार चंद्रमा, संसार भर में उत्सव का माहौल रहेगा। प्राचीन काल से शरद पूर्णिमा को बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसके महत्व और उल्लास के तौर-तरीकों के संबंध में शरद पूनम का महत्व शास्त्रों में भी वर्णित है।

इस रात्रि को चंद्रमा अपनी समस्त कलाओं के साथ होता है और धरती पर अमृत वर्षा करता है। रात्रि 12 बजे होने वाली इस अमृत वर्षा का लाभ मानव को मिले इसी उद्देश्य से चंद्रोदय सायं 5:43 बजे होगा।

उसके बाद के समय आसमान के नीचे खीर या दूध रखा जायेगा, जिसका सेवन रात्रि 12 बजे बाद किया जाएगा उस खीर को खाने से रोगी रोगमुक्त भी हो जाता है। इसके अलावा खीर देवी-देवताओं का विशेष प्रिय भोजन भी है।

शरद पूर्णिमा को कोजागरी लक्ष्मीदेवी (देवी लक्ष्मी) की पूजा की जाती है। पूर्णिमा तिथि सायं 5:35 बजे प्रारंभ होगी जो कि अगले दिन तक रहेगी।

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