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कोजागर पूर्णिमा पर अलग अलग राशि के लोग ऐसे करें माँ लक्ष्मी की पूजा

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2016-10-14 10:20:40.0

कोजागर पूर्णिमा पर अलग अलग राशि के लोग ऐसे करें माँ लक्ष्मी की पूजा

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शरद पूर्णिमा या कोजागर पूर्णिमा हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी का व्रत रखने व उनकी आराधना करने से माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। शरद पूर्णिमा अर्थात कोजागरी व्रत आश्विन शुक्ल मध्य रात्रि व्यापिनी पूर्णिमा में किया जाता है। ज्योतिषिय नियमों के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। इस दिन के संदर्भ में एक मान्यता प्रसिद्ध है कि इस दिन भगवान श्री कृ्ष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने की मान्यता प्रसिद्ध है। इसी कारण इस दिन खीर बनाकर रात्रि काल में चन्द्र देव के सामने चांदनी में व मां लक्ष्मी को अर्पितकर अगले दिन प्रात: काल में ब्रह्मण को प्रसाद वितरण व फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करने का विधि-विधान है। इस दिन एरावत पर आरूढ़ हुए इन्द्र व महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इससे अवश्य ही लक्ष्मी और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस रात्रि की मध्यरात्रि में देवी महालक्ष्मी अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए संसार में विचरती हैं

इस प्रकार यह शरद पूर्णिमा, कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। इससे प्रसन्न हुईं मां लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं और शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे और जितेन्द्रिय भाव से रहे। मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित कर भिन्न-भिन्न उपचारों से उनकी पूजा करें, तदनंतर सायंकाल में चन्द्रोदय होने पर घी के 100 दीपक जलाए।

लक्ष्मीजी को प्रसनन करने के लिए इस मंत्र का जाप करें

मंत्र-

'ॐ इन्द्राय नमः',

'ॐ कुबेराय नमः'

"ॐ धनदाय नमस्तुभ्यं, निधि-पद्माधिपाय च। भवन्तु त्वत्-प्रसादान्ने, धन-धान्यादि-सम्पदः।।"

मेष- क्या करें-चावल पकाकर देसी घी डालकर पक्षी को दें।

क्या न करें-अतिआत्मविश्वास में ना रहें।

वृषभ- क्या करें-गुरु का आशीर्वाद लें।

क्या न करें-बाहर ज्यादा नहीं खाए-पीए।

मिथुन-क्या करें-आज व्रत रखे व एक समय भोजन करें।

क्या न करें-बड़ों की बात को दिल पर ना लें।

कर्क-क्या करें-लाल चंदन का तिलक ललाट पर लगाएं।

क्या न करें-लापरवाही से बचें।

सिंह-क्या करें-संध्या काल में तुलसी के पौधे के समक्ष घी के दीपक में दो लौंग डालकर जलाएं व प्रणाम करें।

क्या न करें-यात्रा नहीं करें।

कन्या-क्या करें-मस्तक पर गोपीचंदन का तिलक लगायें।

क्या न करें-मित्रों की संगत से दूर रहें।

तुला-क्या करें-श्री कृष्ण जी की अराधना करें।

क्या न करें-कोई नया अग्रीमेंट नहीं करें।

वृश्चिक-क्या करें-पीपल वृक्ष के समक्ष तिल के तेल का दीपक जलायें।

क्या न करें-वाहन नहीं चलायें।

धनु- क्या करें-राधाकृष्ण की मूर्ति के सामने तुलसी का पौधा एवं गंगाजल रखें।

क्या न करें-जल्दबाजी नहीं करें।

मकर-क्या करें-परिवार के साथ हनुमान मंदिर अवश्य जायें।

क्या न करें-बुरा नहीं सोचें।

कुम्भ-क्या करें-हनुमान मंदिर में लाल चंदन दान करें।

क्या न करें-अपशब्द नहीं कहें।

मीन-क्या करें-सूती लाल कपड़े में थोड़ी सी सौंफ बांधकर अपने साथ रखें।

क्या न करें-किसी की बुराई नहीं करें।

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