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कौरवों की तीन गलतियां, इन्हें वर्तमान में न दोहराएं

👤 Admin2 user | Updated on:2017-03-03 11:51:14.0

कौरवों की तीन गलतियां, इन्हें वर्तमान में न दोहराएं

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महाभारत के बारे में हम सभी काफी कुछ जानते हैं। महाभारत द्वापरयुग की उन सच्चाई को बयां करने वाला एक महान ग्रंथ है, जो वर्तमान में भी मौजूद है। लेकिन महाभारत में ऐसी कई गलतियां कौरवों ने की थी।

जिन्हें यदि वर्तमान में दोहराने की गलतियां बिल्कुल भी न करें। ऐसा करने पर आपके घर, परिवार, व्यवसाय और यहां तक की आपकी छबि भी धूमिल हो सकती है।

भाईयों से की थी शत्रुता: कौरव और पांडव भाई थे। लेकिन दोनों की बीच मतभेद इतने अधिक पनपते गए कि एक दिन वह दुश्मन बन गए। उस सदी का सबसे बड़ा युद्ध लड़ा गया जो कौरवों और पांडवों के बीच था। हुआ यूं कि पांडव जीत गए क्योंकि वह कौरवों के प्रति अपनेपन का अहसास रखते थे। कोशिश करें कि परिवार में इस तरह की परिस्थिति यदि बन भी रही हो, तो उसे समझदारी से हल करने की कोशिश करें।

स्त्री को नहीं दिया था सम्मान: कौरव 100 थे। उनके बड़े भाई का नाम दुर्योधन था। दुःशासन कौरवों की ही भाई था। दुःशासन वही था, जिसने भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण किया था। यह एक ऐसी गलती थी। जिसके कारण महाभारत युद्ध की आधारशिला रखी गई।

कौरव दूसरों के बहकावे में आए : कौरवों के मामाश्री थे शकुनि, शकुनि अपनी बहन के बेटे यानी दुर्योधन को हस्तिनापुर के सम्राट के रूप में देखना चाहते थे। इस लालच भरी महत्वाकांक्षा के कारण ही शकुनि ने बचपन से ही कौरवों के मन में पांडवों के प्रति नफरत के बीज बोए और आलम यह था कि कौरव भी शकुनि के बहकावे में आते रहे।

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