Home » धर्म समाचार » 5000 साल पहले हरा-भरा था सहारा रेगिस्तान, होती थी 10 गुना ज्यादा बारिश

5000 साल पहले हरा-भरा था सहारा रेगिस्तान, होती थी 10 गुना ज्यादा बारिश

👤 Admin2 user | Updated on:2017-01-23 07:41:31.0

5000 साल पहले हरा-भरा था सहारा रेगिस्तान, होती थी 10 गुना ज्यादा बारिश

Share Post

दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा मरुस्थल हजारों वर्ष पहले हरा-भरा था। पांच से 11 हजार वर्ष पहले इस क्षेत्र में मौजूदा समय की तुलना में दस गुना ज्यादा बारिश होती थी। बाद में सूखे के कारण यहां बसे लोगों को पलायन करना पड़ा।

अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सहारा रेगिस्तान से तकरीबन 1300 किलोमीटर दूर समुद्री तलछट के विश्लेषण के आधार पर चौंकाने वाले रहस्य का खुलासा किया है। हजारों साल पहले सहारा क्षेत्र शिकार और पेड़-पौधों पर जीवन-यापन करने वाले लोगों का गढ़ हुआ करता था। भू-वैज्ञानिक जेसिका टायरनी ने बताया कि छह हजार साल पहले सहारा का वातावरण आज के मुकाबले दस गुना ज्यादा आर्द्र था। पुरातात्विक साक्ष्यों के मुताबिक उस समय पूरे सहारा क्षेत्र में मानव का निवास था। इस अवधि को 'ग्रीन सहारा' का नाम दिया गया है। अब इस क्षेत्र में एक इंच से भी कम बारिश होती है।

ग्रीन सहारा काल के मध्य में (तकरीबन आठ हजार साल पहले) मौसम के अत्यधिक शुष्क होने के कारण लोगों को पलायन शुरू हुआ था। एक हजार वर्ष तक ऐसा ही मौसम रहा। शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद फिर से मानव की बसावट शुरू हुई। लेकिन, इस बार लोग शिकार के बजाय पशुपालन करने लगे थे।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ये आंकड़े जलवायु परिवर्तन संबंधी अनुमानों को बेहतर बना सकते हैं। प्राचीन समय में सहारा हरा-भरा था, यह जानकारी पहले के शोधों से मिल चुकी थी, लेकिन यहां के कितने हिस्से में कितना पानी मौजूद था, इस बारे में कोई ठोस आंकड़ा मौजूद नहीं था। वैज्ञानिक किसी भी जगह से वातावरण का अतीत जानने के लिए प्राचीन झीलों की तलहटी की जांच कर आंकड़े जुटा सकते हैं, लेकिन सहारा में मौजूद झीलें बहुत पहले ही सूख चुकी थीं और उनकी तलहटी में मौजूद अवशेषों को हवा उड़ाकर ले जा चुकी थी।

ऐसे में शोधकर्ताओं की टीम ने पश्चिमी अफ्रीका में चार अलग-अलग जगहों पर समुद्रीय तलछटों का अध्ययन किया। इससे ना केवल उन्हें उस काल में सहारा में होने वाली वर्षा का, बल्कि हरित सहारा के इलाके के बारे में भी ठोस आंकड़े मिले। यह शोध साइंस एडवांसेज नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

Like Us
Share it
Top