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नेपाल का यह राजा मानता था स्वयं को विष्णु जी का अवतार

👤 A2ZNews Channel | Updated on:2017-01-07 11:08:03.0

नेपाल का यह राजा मानता था स्वयं को विष्णु जी का अवतार

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नेपाल पहले भारत का ही अभिन्न हिस्सा था। यह बात करीब 12 वीं 13 वीं शताब्दी की है, जब नेपाल क्षेत्र में मल्ल साम्राज्य के दौरान शिव की उपासना (शैव संप्रदाय) का चलन प्रारंभ हुआ।

समय की सुई कुछ इस तरह बदली कि 14 वी शताब्दी में एक मल्ल राजा जयधर्म मल्ल ने विष्णु की आराधना प्रारंभ की और स्वयं को विष्णु का अवतार घोषित कर दिया। इस तरह 16 वीं शताब्दी में राजा के पुत्र प्रताप मल्ल ने विष्णु के अवतार की परंपरा जारी रखी।

जानिए वैष्णव संप्रदाय की 8 बातें...

# वैष्णव धर्म या 'वैष्णव सम्प्रदाय' का प्राचीन नाम 'भागवत धर्म' या 'पांचरात्र मत' है। इस सम्प्रदाय के प्रधान उपास्य देव वासुदेव हैं, जिन्हें छ: गुणों ज्ञान, शक्ति, बल, वीर्य, ऐश्वर्य और तेज से सम्पन्न होने के कारण भगवान या 'भगवत' कहा गया है और भगवत के उपासक 'भागवत' कहलाते हैं।

# इस सम्प्रदाय की पांचरात्र संज्ञा के सम्बन्ध में अनेक मत व्यक्त किये गये हैं।

# 'महाभारत' के अनुसार चार वेदों और सांख्ययोग के समावेश के कारण यह नारायणीय महापनिषद पांचरात्र कहलाता है।

# 'नारद पांचरात्र' के अनुसार इसमें ब्रह्म, मुक्ति, भोग, योग और संसार–पांच विषयों का 'रात्र' अर्थात ज्ञान होने के कारण यह पांचरात्र है।

# 'ईश्वरसंहिता', 'पाद्मतन्त', 'विष्णुसंहिता' और 'परमसंहिता' ने भी इसकी भिन्न-भिन्न प्रकार से व्याख्या की है।

'शतपथ ब्राह्मण' के अनुसार सूत्र की पांच रातों में इस धर्म की व्याख्या की गयी थी, इस कारण इसका नाम पांचरात्र पड़ा।

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