पाकिस्तानी परमाणु बम ने रोका भारत से युद्ध : खान
Saturday, 4th September 2010
पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक और कुख्यात परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने कहा है कि उनके देश के परमाणु जखीरे ने ही भारत के साथ परंपरागत युद्ध रोका और इसी वजह से देश गर्व के साथ खड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु सामग्री की कालाबाजारी करने के आरोपी खान ने पत्रिका ‘न्यूजवीक पाकिस्तान’ के आरंभिक अंक को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘हमारे परमाणु कार्यक्रम ने हमारी संप्रभुता, सुरक्षा और अस्तित्व को कायम रखा। मुझे फक्र है कि सहयोगियों और अपनी देशभक्ति के साथ मैंने इसमें सहयोग दिया।’
परंपरागत युद्ध का खतरा कम हुआ-उन्होंने कहा कि ज्यादातर पाकिस्तानियों की तरह उनकी भी यही सोच है कि परमाणु बम होने के कारण भारत के साथ परंपरागत युद्ध का खतरा कम हुआ। पाकिस्तान के पास कोई स्थायी पहचान नहीं होने संबंधी लोकप्रिय सिद्धांत के बारे में पूछे जाने पर खान ने कहा, ‘पाकिस्तान कृत्रिम रूप से बना देश नहीं है। भारत में हम मुसलिम एक विशिष्ट संस्कृति, इतिहास, सामाजिक व्यवस्था और विरासत के साथ एक अलग राष्ट्र थे।’ उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से संकीर्ण मानसिकता वाले नेताओं ने देश को जातीय समूहों में बांट दिया, जिससे संघर्ष और शोषण बढ़ा।अफगानिस्तान युद्ध परमाणु कार्यक्रम के लिए वरदान-पश्चिमी देशों की पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को गलत हाथों में पड़ने संबंधी आशंकाओं को खारिज करते हुए खान ने कहा, ‘एक अच्छा या खराब परमाणु हथियार बहुत जटिल और परिष्कृत उपकरण है। ऐसे उपकरण को बनाने के लिए काफी अधिक हिस्सों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। अनपढ़ और अप्रशिक्षित आतंकवादियों की बात तो छोड़िए बिना उपयुक्त अनुभव के वैज्ञानिक और इंजीनियर भी इसे बनाने में सक्षम नहीं हैं।’ अफगानिस्तान युद्ध को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के लिए वरदान बताते हुए खान ने कहा कि पश्चिमी देशों ने परमाणु कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग नहीं दिया। वे अफगानिस्तान में रूसी की मौजूदगी से इतने आशंकित थे कि उन्होंने इसका सक्रिय विरोध भी नहीं किया।
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