राष्ट्रमंडल खेल में बढ़ती अव्यवस्थाएँ
Saturday, 4th September 2010
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दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही हैं, वैसे वैसे उसकी समस्याएँ और अव्यवस्थाएँ भी उजागर होने लगी हैं। यमुना किनारे बने खेलगाँव और उसके आसपास के क्षेत्रों में डेंगू फैलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और उस पर वहाँ चूहों और बंदरों की उपस्थिति ने नई समस्या पैदा कर दी है। इसके अलावा कई बार दवाईयों के छिड़काव के बावजूद मच्छरों और अन्य कीड़े खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं।इन सभी समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्वास्थ्य समिति की है, लेकिन उसके अध्यक्ष के बयान से लगता है कि वे इस मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। एमसीडी स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष डॉ. वीके मोंगिया ने कहा कि खेल स्थलों का चयन बहुत गलत हुआ। नदी किनारे होने की वजह से यह जगह मच्छरों एवं अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास है। वहाँ अब चूहे एवं बंदर भी आ रहे हैं। हमने खेलगाँव के आसपास बंदरों को देखा। चूहे से प्लेग एवं टाइफस फैलता है।
अब डॉ. वीके मोंगिया ये तो मान रहे हैं कि खेलगाँव के आसपास मच्छरों का प्रकोप है और उनसे कई घातक बीमारियाँ फैल सकती हैं, लेकिन इस समस्या का निदान करने के बजाय डॉ. मोंगिया कहते हैं कि मैंने इस बारे में पहले भी कहा था और आज भी मैं कह रहा हूँ कि यमुना किनारे खेलगाँव का चयन काफी गलत फैसला था।इस बयान का क्या अर्थ लगाया जाए? क्या डॉ. मोगिया यह कह रहे हैं कि खेलगाँव का स्थान चुनने में उनकी बात नहीं मानी गई तो अब डेंगू फैले, फ्लेग हो या कि टाइफस की चपेट में खिलाड़ी आएँ, उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं। इसके अलावा डॉ मोंगिया का खुलेआम यह बयान देना कि यमुना किनारे खेलगाँव बनाने के लिए उन्होंने पहले ही अपनी असहमति जता दी थी, दर्शाता है कि आयोजन समिति और स्वास्थ्य विभाग में समन्वयता की कमी है।ऐन समय पर अधिकारियों द्वारा हाथ खड़े कर देने से निश्चित ही आयोजन की तैयारियों पर असर पड़ेगा। सोचने वाली बात है कि जब इतने बड़े मसले पर आला अधिकारियों में ही मतभेद हैं तो फिर क्या हम उम्मीद करना चाहिए कि राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन सफल हो पाएगा?
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