ब्लेयर ने पहनाया ' ब्राउन' को पागल का 'क्राउन'
Thursday, 2nd September 2010
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लंदन.ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अपने उत्तराधिक ारी रहे गॉर्डन ब्राउन को ‘मुश्किल और पागल कर देने वाला’ शख्स करार दिया है। ब्लेयर ने कहा है कि उनकी भावनात्मक बुद्धिमता ‘जीरो’ है। गॉर्डन को आड़े हाथों लेते हुए टोनी ने अपनी जीवनी ‘ए जर्नी’ में यह भी कह डाला कि प्रधानमंत्री के तौर पर ब्राउन का कार्यकाल किसी ‘आपदा’ सरीखा था जो कभी भी मुफीद नहीं होगा। टोनी ब्लेयर की यह टिप्पणियां लेबर पार्टी के पुराने जख्मों को हरा कर सकती हैं।ब्लेयर ने अपनी जीवनी में अपने कार्यकाल की कई अहम घटनाओं पर लिखा है। इराक युद्ध पर ब्लेयर ने लिखा है कि उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है। हालांकि, उन्हें इस बात का गम जरूर है कि युद्ध में कई सैनिकों और नागरिकों की जान चली गई। ब्लेयर ने लिखा है कि उन्होंने इन मौतों के लिए कई बार आंसू बहाए लेकिन सद्दाम हुसैन को अपदस्थ करने के लिए छेड़ी गई लड़ाई जरूरी थी। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री ने अल्कोहल के इस्तेमाल की अपनी लत, महारानी से उनके ताल्लुकात और राजकुमारी डायना के साथ अपने रिश्तों को भी अपनी जीवनी में पिरोया है।बुधवार को सार्वजनिक हुई अपनी जीवनी ‘ए जर्नी’ में करिश्माई नेता ब्लेयर ने अपने सहयोगी और विरोधी रहे ब्राउन को निशाने पर लेते हुए कहा है कि वह ‘पागल कर देने वाले’ और ‘मुश्किल’ इंसान हैं। टोनी ने अपनी जीवनी में ‘दि गॉर्डन प्रॉब्लम - दि कॉम्बिनेशन ऑफ द ब्रिलिएंट एंड द इंपॉसिबल’ के माध्यम से गॉर्डन ब्राउन का पूरा ब्योरा देने की कोशिश की है।टोनी के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने लगातार तीन आम चुनावों में जीत हासिल की लेकिन इस साल मई महीने में ब्राउन की अगुवाई में हुए आम चुनाव में पार्टी को मुंह की खानी पड़ी। 1997 से ही प्रधानमंत्री का पद संभाल रहे टोनी के कार्यक ाल में ब्राउन देश के वित्त मंत्री थे।टोनी ने लिखा है कि उनका उत्तराधिकार ‘बुद्धिमतापूर्ण नहीं था क्योंकि यह कहीं काम आने नहीं जा रहा।’ टोनी ने ब्राउन को ऐसा शख्स करार दिया जिसमें राजनीतिक सूझ-बूझ की कमी है। टोनी ने ब्राउन के व्यक्तित्व को कुछ इस तरह से आंका है,‘राजनीतिक गणित-हां, राजनीतिक भावनाएं- नहीं, विश्लेषणात्मक बुद्धिमता-निश्चित तौर पर, भावनात्मक बुद्धिमता- जीरो।’ वैसे, ‘ए जर्नी’ में ब्लेयर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर खासा मेहरबान नजर आए हैं। उन्होंने बुश को बुद्धिमान और एक सच्चे आदर्शवादी के साथ-साथ एक ऐसे इंसान के तौर पर पेश किया है जिसमें निष्ठा कूट-कूट कर भरी है।
पद के दबाव से जूझने के लिया शराब का सहारा-टोनी ब्लेयर ने पहली बार स्वीकार किया है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद के दबाव को झेलने के लिए उन्होंने शराब का सहारा लिया था। ‘ए जर्नी’ में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा है कि काम का बोझ उन पर हावी हो गया था और वे निश्चित तौर पर यह नहीं बता सकते कि शराब उन्हें नियंत्रित कर रही थी या शराब पीने पर उनका नियंत्रण था। दिन भर की थक ान को मिटाने के लिए वह शराब का सहारा लेते थे और उन्होंने स्वीकार किया है कि इसकी मात्रा सीमा से अधिक होती थी।
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